आग बुझा रहा हूँ मैं

आग बुझा रहा हूँ मैं
पानी पिला रहा हूँ मैं
आँखें बना रहा है तू
आंसू बहा रहा हूँ मैं
दिल तो नहीं मिला सका
रस्ते मिला रहा हूँ मैं
उसके बदन की धूप में
दरिया सुखा रहा हूँ मैं
दूध-ए-चिराग-ए-इश्क को
शोला बना रहा हूँ मैं
झील में तेरा अक्स है
पानी हिला रहा हूँ मैं
उसको सिखाई काफ़री
जिसका खुदा रहा हूँ मैं
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