अब्द होने का तजुर्बा क्या है

अब्द होने का तजुर्बा क्या है
उसने सोने का तजुर्बा किया है

तुम उन्हें बारिशें समझते हो
हमने रोने का तजुर्बा किया है

यह परिंदा न डूबता, उसने
पर भगाने का तजुर्बा किया है

उसने नाख़ुन बढ़ाए और हम ने
ज़ख़्म होने का तजुर्बा किया है

हम से खेला गया है सच मच में
या खिलौने का तजुर्बा किया है

आस की आँखों में हम नहीं डूबे
यूं ही खोने का तजुर्बा किया है

एक पत्थर उठा के चादर में
संग धोने का तजुर्बा किया है
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