बिछड़ रहे थे कोई हौसला ज़रूरी था

बिछड़ रहे थे कोई हौसला ज़रूरी था
निगाह भर के तुझे देखना ज़रूरी था

इन्हीं दिनों मुझे जब मिल रहे थे दूसरे लोग
इन्हीं दिनों तेरा मिलना बड़ा ज़रूरी था

वो कह रहे थे ज़रूरी था साथ होता कोई
तो मैंने आह भरी और कहा ज़रूरी था

भटकने वाले ने मरते हुए कहा... यारो
मुझे यकीन है... शायद ख़ुदा ज़रूरी था

ख़ुदा से इतनी शिकायत तो मेरी बनती थी
कि मुझसे पूछ तो लेना था क्या ज़रूरी था
Share: