चश्म-ए-नमनाक ने समझना है

चश्म-ए-नमनाक ने समझना है
मेरा ग़म ख़ाक ने समझना है

कितना पानी है तेरी आँखों में
एक तैराक ने समझना है

तीसरा इस लिए बनाया गया
जुफ़्त को ताक ने समझना है

एक शोला कि जिसको सिगरेट ने
और पोशाक ने समझना है

मैं उड़ाया गया कि मुझको तेरे
हफ़्त अफ़लाक ने समझना है

ज़ख़्म पीवंद क्यों नहीं होता
ये तेरे चाक ने समझना है

जस्म ने जस्म को पुकारा है
ख़ाक को ख़ाक ने समझना है

यार हमसे गुनाहगारों को
फिर किसी पाक ने समझना है
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