छोटे होने लगे बड़े मेरे
अब कहाँ मैं, कहाँ धड़े मेरे
बाप के दुश्मनों की फ़तह हुई
भाई आपस में लड़ पड़े मेरे
सोहनी को पसंद आए नहीं
तैरते रह गए घड़े मेरे
है दुपट्टा तेरा, मेरी दस्तार
और कंगन तेरे, कड़े मेरे
कश्तियों पर सफ़र किया मैंने
पानीयों पर निशान पड़े मेरे
धूप झुलसा रही है चेहरे भी
फूल ऐसे नहीं झड़े मेरे
बैठ कर उस से बात करना थी
जा चुका जो खड़े-खड़े मेरे
एक नया शहर बस रहा है नदीम
महल उसके हैं, झोंपड़े मेरे
अब कहाँ मैं, कहाँ धड़े मेरे
बाप के दुश्मनों की फ़तह हुई
भाई आपस में लड़ पड़े मेरे
सोहनी को पसंद आए नहीं
तैरते रह गए घड़े मेरे
है दुपट्टा तेरा, मेरी दस्तार
और कंगन तेरे, कड़े मेरे
कश्तियों पर सफ़र किया मैंने
पानीयों पर निशान पड़े मेरे
धूप झुलसा रही है चेहरे भी
फूल ऐसे नहीं झड़े मेरे
बैठ कर उस से बात करना थी
जा चुका जो खड़े-खड़े मेरे
एक नया शहर बस रहा है नदीम
महल उसके हैं, झोंपड़े मेरे

