फलक के चाँद को घरकाब देखने के लिए

फलक के चाँद को घरकाब देखने के लिए
सितारे आए हैं तालाब देखने के लिए

बवक्त-ए-फजर बलाए गए हैं मस्जिद में
तमाम रात के बे-ताब देखने के लिए

यही तो लोग थे बस्ती में जागने वाले
जिन्हें सुलाया गया ख़्वाब देखने के लिए

अगर वो झील पर आए तो जमा हो जाएं
हजार करमक-ए-शब-ताब देखने के लिए

तुम्हारे जैसे बनाए गए हसीन चेहरे
हमारे जैसे बे-ताब देखने के लिए

नदीम मुझ में उतरने लगा हुजूम मेरा
कोई ख़ज़ाना तह-ए-आब देखने के लिए
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