हाला-ए-मीम के अनवार में आ जाते हैं

हाला-ए-मीम के अनवार में आ जाते हैं
जब अलिफ़ इश्क़ के दरबार में आ जाते
हम परिंदों से कोई इश्क़ का मतलब पूछे
साया-ए-गुंबद-ए-सरकार में आ जाते हैं
आप के वास्ते मिस्वाक अगर बन जाए
नाज़ उस शाख़-ए-लचकदार में आ जाते हैं
यूँ मदीने में चले आए तेरे हिंद के रिंद
गुमशुदा जैसे परिवार में आ जाते हैं
हफ्त अफ़लाक से आगे का सफ़र है मेराज
हफ्त अफ़लाक तो दस्तार में आ जाते हैं
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