हम ने पूरा जोर लगा कर रक्स किया

हम ने पूरा जोर लगा कर रक्स किया
शर्म गई तो सामने आ कर रक्स किया

दुनिया मस्तों को बे इल्म समझती थी
हम ने फिर क़ुरआन सुना कर रक्स किया

जिस ने हम को रोकना चाहा नाचने से
उस की आँख से आँख मिला कर रक्स किया

छोड़ दिया मछली को वापस दरिया में
और फिर अपना हिज्र मना कर रक्स किया

अपनी मिट्टी गूंथी अपने अश्कों से
अपने चाक को आप घमा कर रक्स किया

तुम ने सिर्फ बदन से उस को पूजा है
हम ने रूह को साथ मिला कर रक्स किया

गोरी तुझ को ख्वाहिश दे कर हम रोए
सानवली तुझ को ख्वाब दिखा कर रक्स किया

एक मुकाम पे नूर भी जलने लगता है
और वहाँ पर खाक ने जा कर रक्स किया

वह्म को अपने सामने ला कर रक्स किया
इसम पे एक तस्वीर सजा कर रक्स किया

बल्हे शाह ने ढोल बजाया और हम ने
बाहू की नगरी में जा कर रक्स किया

होली खेली पीर नजामुद्दीन के साथ
और ख़ुसरो को साथ नचा कर रक्स किया

ग़ौस क़ुत्ब अब्दाल मुबारकें देने लगे
क़ादरी चिश्ती रंग मिला कर रक्स किया

यार मनाने की खातिर सब नाचे हैं
हम ने अपना यार मना कर रक्स किया
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