हुस्न हमतन गोश है इश्क सलाम करे

हुस्न हमतन गोश है इश्क सलाम करे
साईं सिखाए बोलना साईं कलाम करे
इश्क शरीअत साज़ है इश्क तरीक़त सोज़
हुक्म चलाए आप पर आप ग़ुलाम करे
पाँच महल हैं प्रेम के पाँचों में है नूर
सजदा राही प्रेम का किस किस गाम करे
साईं आगे कर दिया अपने आप को ढेर
चाहे तो अब ख़ास हैं चाहे आम करे
दिल में इक दिलदार है जिससे उसका प्रेम
वही हरम में आ बसे और एहराम करे
ऐसा नौकर चाहिए जो तनख़्वाह न ले
शब भर रोए ज़ार ज़ार दिन भर काम करे
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