जैसा हूँ, जिस हाल में हूँ, अच्छा हूँ मैं

जैसा हूँ, जिस हाल में हूँ, अच्छा हूँ मैं
तुमने ज़िंदा समझा तो ज़िंदा हूँ मैं।

खुले हुए दरवाज़ों पर दस्तक मत दो
अंदर आ जाओ, पहचान चुका हूँ मैं।

और कोई पहचान मेरी बनती ही नहीं
जानते हैं सब लोग कि बस तेरा हूँ मैं।

जाने किस को राज़ी करना है मुझ को
जाने किस की ख़ातिर नाच रहा हूँ मैं।

दिल के काबे में दो चार सनम भी हूँ
एक ख़ुदा के साथ बहुत तन्हा हूँ मैं।

अब तो ये भी याद नहीं कि मोहब्बत में
कब से तेरे पास हूँ और कितना हूँ मैं।

इक आवाज़ के आते ही मर जाऊँगा
इक आवाज़ के सुनने को ज़िंदा हूँ मैं।
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