किस किसे खबर थी मुलाकात आखिरी होगी

किस किसे खबर थी मुलाकात आखिरी होगी
कि उसके हाथ में सदियां नहीं घड़ी होगी

अगर सवाल नहीं होंगे खामोशी होगी
समाअतों को भी आवाज की कमी होगी

धुएं की धुंध में धुंधलाए शहर के लोगो
तुम्हें शजर की कोई बद-दुआ लगी होगी

जहां जहां पे भंवर पड़ रहे हैं पानी में
वहीं कहीं पे कोई आग भी लगी होगी

हुजूर हुक्म तो दीजे गुलाम हाजिर है
हुजूर फिक्र नहीं कीजे नौकरी होगी

नदीम साईं अजब तर्ज का अंधेरा है
चराग बोलें तो हुजरे में रोशनी होगी
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