मैं ऐसे मोड़ पर अपनी कहानी छोड़ आया हूँ

मैं ऐसे मोड़ पर अपनी कहानी छोड़ आया हूँ
किसी की आँख में पानी ही पानी छोड़ आया हूँ

अभी तो उससे मिलने का बहाना और करना है
अभी तो उसके कमरे में निशानी छोड़ आया हूँ

बस इतना सोच कर ही मुझ को अपने पास तुम रख लो
तुम्हारे वास्ते मैं हुक्मरानी छोड़ आया हूँ

और अब एहसास होता है तुम्हारे शहर में आ कर
मैं अपना चाँद और रातों की रानी छोड़ आया हूँ

इसी खातिर मेरे चारों तरफ फैला है सनाटा
कहीं मैं अपने लफ्जों के मायने छोड़ आया हूँ
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