मैं खजूरों भरे सहराों में देखा गया हूँ
तख्त के बाद तेरे पाओं में देखा गया हूँ
दफन होती हुई झीलों में ठिकाने हैं मेरे
ख़ुश्क होते हुए दरियाों में देखा गया हूँ
मस्जिदों और मज़ारों में मेरे चर्चे हैं
मंदिरों और कलीसाओं में देखा गया हूँ
बख़्त हूँ और मुझे ढूंढने वाले हैं बहुत
हुस्न हूँ और हसीनाओं में देखा गया हूँ
वस्ल के तीन सौ तेरह में कहीं हूँ मौजूद
हिज्र के मआरका आराओं में देखा गया हूँ
लम्हा भर को मेरे सर पर कोई बादल आया
कहने वालों ने कहा छांव में देखा गया हूँ
फिर मुझे खुद भी खबर हो न सकी मैं हूँ कहाँ
आख़री बार तेरे गाँव में देखा गया हूँ
तख्त के बाद तेरे पाओं में देखा गया हूँ
दफन होती हुई झीलों में ठिकाने हैं मेरे
ख़ुश्क होते हुए दरियाों में देखा गया हूँ
मस्जिदों और मज़ारों में मेरे चर्चे हैं
मंदिरों और कलीसाओं में देखा गया हूँ
बख़्त हूँ और मुझे ढूंढने वाले हैं बहुत
हुस्न हूँ और हसीनाओं में देखा गया हूँ
वस्ल के तीन सौ तेरह में कहीं हूँ मौजूद
हिज्र के मआरका आराओं में देखा गया हूँ
लम्हा भर को मेरे सर पर कोई बादल आया
कहने वालों ने कहा छांव में देखा गया हूँ
फिर मुझे खुद भी खबर हो न सकी मैं हूँ कहाँ
आख़री बार तेरे गाँव में देखा गया हूँ

