मशवरा मान दोस्ता खामोश

मशवरा मान दोस्ता खामोश
इस लिए भी कि है ख़ुदा खामोश

मैं बहुत बोलता था सो मुझ को
नमत्तों से किया गया खामोश

हमने किया क्या नहीं पढ़ा समझा
उसने काग़ज़ पे जब लिखा खामोश

देखना भी पुकारना है उसे
बड़ा आया बना हुआ खामोश

इश्क की पहली बात लब न हलें
इश्क का पहला जायका खामोश

इस लिए खाम है मोहब्बत में
उसने पूरा नहीं पढ़ा खामोश

वर्ना ये कायनात चुप होती
शुक्र उस ने नहीं कहा खामोश
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