मावज़ना अगर अपना किताब से करेगी
हमारी हूर मुहब्बत हिजाब से करेगी
हमें कहेगी कि ख्वाबों में छोड़ दो रहना
फिर अपनी बात का आग़ाज़ ख्वाब से करेगी
किसी घड़े किसी नलके से बे-ग़رض होगी
वो अपनी प्यास की बातें सराब से करेगी
जदीद दौर की लड़की है गर मुहब्बत भी
कभी करेगी तो पूरे हिसाब से करेगी
वो पहली बात करेगी तो फैलेगी खुशबू
वो पहला इश्क़ भी शायद गुलाब से करेगी
हमारी हूर मुहब्बत हिजाब से करेगी
हमें कहेगी कि ख्वाबों में छोड़ दो रहना
फिर अपनी बात का आग़ाज़ ख्वाब से करेगी
किसी घड़े किसी नलके से बे-ग़رض होगी
वो अपनी प्यास की बातें सराब से करेगी
जदीद दौर की लड़की है गर मुहब्बत भी
कभी करेगी तो पूरे हिसाब से करेगी
वो पहली बात करेगी तो फैलेगी खुशबू
वो पहला इश्क़ भी शायद गुलाब से करेगी

