मुझ पे राज़ खुल चुका मेरे दोस्त

मुझ पे राज़ खुल चुका मेरे दोस्त
मैं तेरे वास्ते बना मेरे दोस्त

मैं अकेला लडूँगा दुनिया से
तेरे जिम्मे सिर्फ दुआ मेरे दोस्त

बोलना हिज़्र ने सिखाया है
देखना तू मुझे सिखा मेरे दोस्त

इश्क़ तन्हाई से न हो जाए
हो भी सकता है लौट आ मेरे दोस्त

मैं बहुत याद आने वाला नहीं
मुझसे इतना न खौफ़ खा मेरे दोस्त

जिस जगह फूल और कबूतर हों
उस जगह पर मुझे बना मेरे दोस्त

तुझसे मिलता था ख़्वाब में अक्सर
तू मेरा ख़्वाब ही तो था मेरे दोस्त

ख़ौफ़ में चीखने लगे थे लोग
मैं पुकारा मेरा ख़ुदा मेरे दोस्त
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