क़ैस का शजरह न कोई हम को शोहरत चाहिए

क़ैस का शजरा न कोई हम को शोहरत चाहिए
इक मोहब्बत चाहिए और उस में शिद्दत चाहिए

हम जहां पर हैं वहां ख़्वाहिश का होना है हराम
और होंगे इश्क़ में जिन को सहूलत चाहिए

एक होना और कुछ है, एक हो जाना कुछ और
आईना-ख़ाना ने समझाया कि कसरत चाहिए

साहिबा! तन्हाई व यकताई दोनों एक हैं
मेरे जैसे ख़ुद-पसंदों को तो वहशत चाहिए

ज़िंदगी मसरूफ़तर है और ख़ुदा मसरूफ़-ए-कार
इक मैं ही हूं जिसे पूरी फ़राग़त चाहिए

हम ने ख़ुशियां बांट लीं आपस में और हम बंट गए
जमआ होने के लिए कोई मुसीबत चाहिए
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