क़ैस और लैला का तरफ़दार अगर मर जाए

क़ैस और लैला का तरफ़दार अगर मर जाए
मैं भी मर जाऊं ये किरदार अगर मर जाए

फिर ख़ुदाया तुझे सूरज को बुझाना होगा
आख़री शख़्स है बेदार अगर मर जाए

छुपने वाले तो कभी सोच कि एक दिन बिलफ़र्ज़
ये मेरी ख़्वाहिश-ए-दीदार अगर मर जाए

बाँध रखी है क़बीले ने तवक़्क़ो जिस से
और अचानक ही वो सरदार अगर मर जाए

टूट जाने का दुकानदार को दुख होता है
और खिलौने को, ख़रीदार अगर मर जाए
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