राह में छोड़ कर नहीं जाता

राह में छोड़ कर नहीं जाता
साथ होता अगर नहीं जाता

यूं पड़ा हूं तुम्हारी यादों में
जिस तरह कोई मर नहीं जाता

क्यों मेरा आस-पास घूमता है
क्यों यह नशा उतर नहीं जाता

कितना अच्छा था हमसे पहले वहां
कोई रास्ता अगर नहीं जाता

यूं लगा हूं तेरे गले से मैं
जिस तरह कोई डर नहीं जाता

उंगलियां फेर मेरे बालों में
यह मेरा दर्द-ए-सर नहीं जाता

सब तेरी अंजुमन में बैठे हैं
कोई भी शख्स घर नहीं जाता

इश्क़ इतना भी क्या ज़रूरी है
कोई ब-इश्क़ मर नहीं जाता
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