सदा लपेट के दिल जाएँगे वगर्ना नहीं
पहाड़ आह से हल जाएँगे वगर्ना नहीं
वो आज दरिया से लड़ने की ठान कर गए हैं
कहीं किनारे पे मिल जाएँगे वगर्ना नहीं
हमारे ज़ख्म दिलों और बाज़ुओं पर हैं
जो तुम सीओगे तो सिल जाएँगे वगर्ना नहीं
यह फूल, फूल नहीं हैं मेरी दुआएँ हैं
तेरी हथेली पे खिल जाएँगे वगर्ना नहीं
हमारे जैसे क़लंदर हमारे जैसे फ़कीर
दुआ करो गे तो मिल जाएँगे वगर्ना नहीं
हमारे ज़ख्म हैं इस पेड़ के तने पे नदीम
यह नाख़ूनों से तो छिल जाएँगे वगर्ना नहीं
पहाड़ आह से हल जाएँगे वगर्ना नहीं
वो आज दरिया से लड़ने की ठान कर गए हैं
कहीं किनारे पे मिल जाएँगे वगर्ना नहीं
हमारे ज़ख्म दिलों और बाज़ुओं पर हैं
जो तुम सीओगे तो सिल जाएँगे वगर्ना नहीं
यह फूल, फूल नहीं हैं मेरी दुआएँ हैं
तेरी हथेली पे खिल जाएँगे वगर्ना नहीं
हमारे जैसे क़लंदर हमारे जैसे फ़कीर
दुआ करो गे तो मिल जाएँगे वगर्ना नहीं
हमारे ज़ख्म हैं इस पेड़ के तने पे नदीम
यह नाख़ूनों से तो छिल जाएँगे वगर्ना नहीं

