शाम-ए-ग़म के सब सहारे टूट कर
ख़त्म हो जाएँ न तारे टूट कर
ख़्वाहिशें कुछ मर गई हैं नींद में
ख़्वाब कुछ बिखरे हमारे टूट कर
बारिशों ने काम दरिया का किया
क्या करेंगे अब किनारे टूट कर
एक तुम्हारा इश्क़ ज़िंदा रह गया
मर गए हम लोग सारे टूट कर
मुझ को फिर इज़्न-ए-मसाफ़त दे गए
आसमां पर कुछ सितारे टूट कर
हम सुफ़ाल-ए-बे-मरक़्क़ब हैं नदीम
गिर रहे हैं बुत हमारे टूट कर
ख़त्म हो जाएँ न तारे टूट कर
ख़्वाहिशें कुछ मर गई हैं नींद में
ख़्वाब कुछ बिखरे हमारे टूट कर
बारिशों ने काम दरिया का किया
क्या करेंगे अब किनारे टूट कर
एक तुम्हारा इश्क़ ज़िंदा रह गया
मर गए हम लोग सारे टूट कर
मुझ को फिर इज़्न-ए-मसाफ़त दे गए
आसमां पर कुछ सितारे टूट कर
हम सुफ़ाल-ए-बे-मरक़्क़ब हैं नदीम
गिर रहे हैं बुत हमारे टूट कर

