सुख़न गोयम ब-तर्ज़-ए ऊ हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो

सुख़न गोयम ब-तर्ज़-ए ऊ हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
ब-हुक्म हज़रत-ए बाहू हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
मैं उसके इश्क़ की मस्ती, मैं उसके हुस्न की शोखी
मैं उसके रू-ब-रू हो हो, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
मुझी में ताल और सुर है, मुझी में राग और गुर है
मुझी में हो बहू या हो, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
वस्ल-ए-यार ख़ुश आमद, फ़िराक़-ए-यार ख़ुश आमद
अयां हो हो, निहां हो हो, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
बदन के मशरिकों में, मग़रिबों में बंदगी उसकी
हर एक जानिब हूं क़िब्ला रू, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
तेरे इकरार से मैं हूं, मेरे इनकार से तू है
सो अब होना न होना तू, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
अज़ान-ए-वस्ल सुनता हूं, सो इज़्न-ए-वस्ल पाता हूं
हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो, हो अल-हक़ हो
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