सख़्न तमाशा बना शायरी ख़राब हुई

सुख़न तमाशा बना शायरी ख़राब हुई
तमाशबीनों में आ कर परी ख़राब हुई

हमें सिखाओ नहीं बज़्म के अदब-आदाब
मियाँ हमारी यहाँ ज़िंदगी ख़राब हुई

ख़ुदा का शुक्र मुझे बे-हिसाब वक़्त मिला
ख़ुदा का शुक्र अचानक घड़ी ख़राब हुई

न फूल आए फलों तक न फल उतारे गए
जब उस अनार की पत्तों भरी ख़राब हुई

ज़माना अपने ख़राबे समेत उस से मिला
फिर उस के बाद वो लड़की बड़ी ख़राब हुई

फिर एक रोज़ अँधेरे ने साथ छोड़ दिया
चराग़ टूट गया रोशनी ख़राब हुई
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