तुम्हारे बाद खुद को देखना है

तुम्हारे बाद खुद को देखना है
कि मुझ में और कितना हौसला है

मुकम्मल तुझ को भी करना नहीं है
तुझे लिख कर अधूरा छोड़ना है

ज़मीन का आखिरी हिस्सा हैं आंखें
जहां इंसान आकर डूबता है

न जाने किस पे मुश्किल वक्त आया
कोई खत में हथेली भेजता है

मुझे यकसर अता कर दे खुदाया
मेरी किस्मत में जो कुछ भी लिखा है

मोहब्बत ही खुदा से मांगते हैं
मोहब्बत ही हमारा मसला है

नदीम इक शख्स को पाने की खातिर
मुझे हद से गुजरना पड़ गया है
Share: