यह नहर और किनारे तुम्हें समझते हैं

यह नहर और किनारे तुम्हें समझते हैं
तमाम पेड़ हमारे तुम्हें समझते हैं

हमें तो छोड़ो कि हम इस जहां के हैं ही नहीं
सवाल यह है तुम्हारे तुम्हें समझते हैं

समझ रहे हैं जिन्हें लोग आसमान का हुस्न
वो चाँद और सितारे तुम्हें समझते हैं

हसीन लोगों तुम्हारे फरेब हम तक हैं
हमारे बाद के सारे तुम्हें समझते हैं
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