अलविदाई

मेरे इश्क़, दुआएँ लेता जा
मुझे छोड़ के जा या तोड़ के जा
मुझे देख नहीं, मुँह मोड़ के जा
तेरे बाद मेरी हालत है क्या
तुझे इससे क्या
मेरे इश्क़, दुआएँ लेता जा
मेरा हिज्र ही मेरे पास रहे
तेरे वस्ल की रात सलामत हो
मेरी सच्ची बातें झूठी हों
तेरी झूठी बात सलामत हो
मेरी सुबहें काली हो जाएँ
तेरी रौशन-रौशन शाम रहे
मैं रहूँ या न रहूँ इस दुनिया में
तेरा नाम रहे
तेरे नाम की एक खैरात मिले
मुझे कोई मुकम्मल रात मिले
कोई पूरा ज़िक्र या बात मिले
मैं आधे ख़्वाब का बंदा हूँ
जिसे कोई गिरह नहीं लग सकती
वह मिसरा हूँ
मैं झूठा था, मैं झूठा हूँ
तुझे जाना है, तू जल्दी जा
मैं ये भी नहीं अब पूछूँगा
मेरा जुर्म है क्या
मेरे इश्क़, दुआएँ लेता जा
मेरे हाथों ने तुझे थामा था
ये हाथ बदन से काट ले तू
मेरी आँखों ने तुझे देखा था
ये आँखें नोच ले चेहरे से
मेरी साँसों ने तुझे चूमा था
वो बोसे छीन ले साँसों से
मेरे जुमले वापस करता जा
कोई जान न ले तेरी बातों से
कभी मैं भी था
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