गुब्बारे बेचता हूं
गुब्बारों में हवा भरता हूं साहब
मैं हवा भरता हूं
जब दम खींचता हूं तो
ज़माने की सभी आलाइंशें सीने में आती हैं
तकब्बुर से खिंचा सीना उठाता हूं
गुब्बारा देख कर मैं मुस्कुराता हूं
फिर इस बे-शक्ल-ओ-सूरत लोथड़े से
बैज़वी दुनिया बनाता हूं
और इस दुनिया में साहब
आप जैसे लोग रहते हैं
गुब्बारों में हवा भरता हूं साहब
मैं हवा भरता हूं
जब दम खींचता हूं तो
ज़माने की सभी आलाइंशें सीने में आती हैं
तकब्बुर से खिंचा सीना उठाता हूं
गुब्बारा देख कर मैं मुस्कुराता हूं
फिर इस बे-शक्ल-ओ-सूरत लोथड़े से
बैज़वी दुनिया बनाता हूं
और इस दुनिया में साहब
आप जैसे लोग रहते हैं

