इमान
मलंग
वापसी
शायर
मूतू क़ब्ल अंता मूतू
ज़िंदगी को चुराने चलते हैं
अलविदाई
दर्द भरी
नज़्म नामा
मसाफ़तें
फ़सील-ए-इश्क़ की बुनियाद से आवाज़ आई
चक़ा
कभी तुम सामने आओ
समझौता
माधो लाल
इश्क़ में हारे हुए जिस्म
कहे फकीर नदीम
हाल
धरती वालों (पंजाबी)
असां कुनो कहिये शाह हुसैन
मसनवी मदीनह तईबा
सिर से पैर तक मसाफ़त
ख़सारा
ढोल बजने लगा
रोही पीर फरीदؒ की
तुम मेरी ज़रूरत हो
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हाल
ए ख़ुदा तुझ में खो गया था मैं
लोग करते रहे नमाज़ अदा
और मस्जिद में सो गया था मैं
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