मुझ को याद कर लेना

ख़ज़ां के ज़र्द पत्तों पर
कोई भूली कहानी या किसी की जिंदगी का
जब कोई भी बाब तुम लिखना
तो मुझ को याद कर लेना
कभी तुम शाम के चुपचाप और सहमे हुए कोने में
तन्हाई के डर में मुब्तला होना
तो मुझ को याद कर लेना
कभी तुम पर दिसंबर लंबी रातों के अगर पत्थर गिराए
और तुम से कुछ न बन पाए
किसी भी वस्ल के लम्हे को फिर तुम ध्यान में लाना
तो मुझ को याद कर लेना
मैं इक एहसास हूं
देखो वही एहसास हूं मैं जो
तुम्हारी जिंदगी की चंद रातों में तुम्हारा था
मैं आवारा किरण हूं
जो कि वीराओं में क़ब्रों पे सख़ावत करने लगती है
कभी तुम रोशनी की चाह में हद से गुजर जाना
तो मुझ को याद कर लेना
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