समझौता

आओ हम इस इश्क का कोई नाम रखें
कुछ सपने ऐसे भी होते हैं
जिनको सिर्फ खुली आँखों से देखा जाता है
कुछ बंधन ऐसे भी होते हैं
जिनको बस महसूस किया जा सकता है
पेड़ के पत्ते गिर जाएं तो
फिर भी इस पर वीराने तो बसते हैं
दिल की कितनी ख़्वाहिशें भी तो एक साथ रह सकती हैं
एक घर में दो कमरे भी तो हो सकते हैं
कमरे के दो हिस्से भी तो हो सकते हैं
कुछ नामुमकिन मुमकिन भी तो हो सकता है
जीवन से समझौता भी तो हो सकता है
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