आख़िरी जुमला बोल दिया जाए तो बात मुकम्मल हो जाती है
आंखें अश्कों से भर जाती हैं
और सारे मंज़र धुंधले हो जाते हैं।
आख़िरी रम्ज़ अगर खुल जाए तो
इज़हार कहीं तालू से चिपका रहता है।
आख़िरी ईंट लगा दी जाए
तो राज मिस्त्री अपनी उजरत लेकर रुख़्सत हो जाता है
और रंगों वाले आ जाते हैं,
रंगों वाले...
गूंगा गुड़ तो खा सकता है
लेकिन कैसे बोलेगा कि गुड़ मीठा है।
अंधा जिसने दुनिया को देखा ही नहीं है,
कैसे दुनिया फ़र्ज़ करेगा?
कैसी दुनिया फ़र्ज़ करेगा?
हम बस ऐसे शायर हैं
सुनी-सुनाई, पढ़ी-पढ़ाई बातें करते रहते हैं,
और ख़ुद को बुद्ध, बाहू और बुल्ले का
हमअसर बताते रहते हैं।
कितने सच्चे और पक्के झूठे हैं।
आख़िरी बातें कर भी लें तो बोलते रहते हैं,
आख़िरी रम्ज़ें खोल के भी कुछ खोलते रहते हैं।
आख़िरी ईंट लगाकर भी दीवारें तोड़ते रहते हैं।
क़ाफ़िया तो बस नाम रखा है, आवाज़ें जोड़ते रहते हैं।
आंखें अश्कों से भर जाती हैं
और सारे मंज़र धुंधले हो जाते हैं।
आख़िरी रम्ज़ अगर खुल जाए तो
इज़हार कहीं तालू से चिपका रहता है।
आख़िरी ईंट लगा दी जाए
तो राज मिस्त्री अपनी उजरत लेकर रुख़्सत हो जाता है
और रंगों वाले आ जाते हैं,
रंगों वाले...
गूंगा गुड़ तो खा सकता है
लेकिन कैसे बोलेगा कि गुड़ मीठा है।
अंधा जिसने दुनिया को देखा ही नहीं है,
कैसे दुनिया फ़र्ज़ करेगा?
कैसी दुनिया फ़र्ज़ करेगा?
हम बस ऐसे शायर हैं
सुनी-सुनाई, पढ़ी-पढ़ाई बातें करते रहते हैं,
और ख़ुद को बुद्ध, बाहू और बुल्ले का
हमअसर बताते रहते हैं।
कितने सच्चे और पक्के झूठे हैं।
आख़िरी बातें कर भी लें तो बोलते रहते हैं,
आख़िरी रम्ज़ें खोल के भी कुछ खोलते रहते हैं।
आख़िरी ईंट लगाकर भी दीवारें तोड़ते रहते हैं।
क़ाफ़िया तो बस नाम रखा है, आवाज़ें जोड़ते रहते हैं।

